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मौर्य वंश और राजा अशोक

सम्राट अशोक के दया, प्रेम, शांति और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना के कारण अशोक के सारनाथ स्तंभ-शीर्ष को हमारा राष्ट्रीय चिन्ह बनाया गया है।

अभ्यास के प्रश्न

(अ) जोड़ी बनाइए

 ख
(1) सेल्युकस यूनानी सेनापति
(2) बिन्दुसार अशोक का पिता
(3) घनानन्द  मगध का शासक
(4) अशोक के शिलालेख पाली भाषा

 

(ब) प्रश्नों के उत्तर दीजिए

प्रश्न 1. चन्द्रगुप्त मौर्य ने किस प्रकार विशाल राज्य की स्थापना की ?

उत्तर – अशोक के दादा चन्द्रगुप्त मौर्य बहुत वीर और साहसी थे चाणक्य नाम के एक बुद्धिमान पण्डित की मदद से चन्द्रगुप्त मौर्य ने मगध के राजा घनानन्द को हरा दिया। उत्तर और पश्चिम के कई हिस्सों को जीतने के अलावा उसने सिकन्दर के सेनापति सेल्यूकस को भी हराकर यूनानी राजाओं का आगे बढ़ना रोक दिया। उसके बाद सेल्यूकस चन्द्रगुप्त मौर्य से मित्रता कर ली और मेगस्थनीज नामक राजदूत उसके पास भेजा। इस प्रकार चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने विशाल राज्य की स्थापना की।

प्रश्न 2. युद्ध न करने का संकल्प अशोक ने क्यों किया?

उत्तर – युद्ध न करने का संकल्प अशोक ने इसलिए लिया क्योंकि उसने कलिंग के युद्ध सफलता प्राप्त की थी लेकिन इस युद्ध में लाखों सैनिक मारे गए, हजारों घायल हो गए और अनेक स्त्री- बच्चे बेसहारा हो गए। यह सब देखकर उसने संकल्प लिया कि वह अब कभी युद्ध नहीं करेगा । उसने यह भी निश्चय किया कि वह हथियारों से शत्रु को हराने की जगह धम्म (धर्म) के रास्तों पर चलकर लोगों के दिल को जीतेगा जिससे लोगों की भलाई हो सके।

प्रश्न 3. अशोक ने राज्य की व्यवस्था को भली-भाँति चलाने के लिए क्या काम किए?
उत्तर- अशोक का राज्य बहुत विशाल था। उसने राज्य को भली-भाँति चलाने के लिए योग्य लोगों का दल था जिसे मंत्रिपरिषद कहा जाता था। ।
उसने अपने विशाल राज्य को चार प्रांतों में बाँटा था :-
उत्तर में तक्षशीला
दक्षिण में सुवर्णगिरी
पूर्व में तोसली
पश्चिम में उज्जयनी
इन नगरों और उसके आसपास के इलाकों की देखभाल राजकुमार करते थे। अनेक अधिकारी और कर्मचारी उन्हें सहयोग करते थे। ये कर्मचारी गाँवों और शहरों की व्यवस्था संभालते थे। ये किसानों,व्यापारियों, कारीगरों से लगान वसूल करते और राजा की आज्ञा का पालन न करने पर उन्हें दंड दिया जाता था।
एक बड़े अधिकारी भी होते थे जिन्हें महामात्र कहा जाता था। वे राज्य भर का दौरा करते और शासन का काम देखते । स्वयं अशोक भी दूर-दूर के गाँवों का दौरा कर अधिकारियों और कर्मचारियों पर नजर रखा करता था।

इसमें दी गई सामग्रियों का छ भाषाओं में अनुवाद प्राप्त कर सकते हैं । इससे अंग्रेजी माध्यमों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सुविधा होगी। साथ ही साथ दूसरी भारतीय भाषाओं में भी इसे अनुवाद कर समझा जा सकता है।इसके लिए ऊपर टॉप पर भारत के राष्ट्रीय झंडे के आईकन के साथ भाषा का चुनाव कर इसे दिए गए भाषाओं में अनुवाद कर सकते हैं।

प्रश्न 5. अशोक के धम्म  के बारे में आप क्या सोचते हो? अपनी भाषा में लिखो ।

उत्तर – अशोक के धम्म में न तो कोई देवी-देवता थे और न ही उसमें कोई व्रत, उपवास या यज्ञ करने की बात कही गई थी । धम्म का पालन करने के लिए पूजा आदि की बात भी नहीं कही गई थी । धम्म से अशोक का तात्पर्य था – आचरण की शुद्धता कलिंग युद्ध के बाद उसने हिंसा का परित्याग कर दिया और प्रजा की सेवा पिता के समान करना ही अपना धर्म माना । प्रजा को सही दिशा दिखाना, राजा का पहला कर्तव्य व धर्म माना गया है। इसके लिए उन्होंने धर्म – महामात्र नामक अधिकारी रखे थे जो गाँव-गाँव का दौरा कर प्रजा को परस्पर सही व्यवहार की बातें बताते थे। अशोक चाहते थे कि सभी धर्मों के लोग शान्तिपूर्वक रहें। दूर-दराज के क्षेत्रों में यही बातें उसने पत्थर के खम्बों और चट्टानों पर खुदवाए थे।

प्रश्न 6 अशोक अपने राज्य के आदेश जनता तक कैसे पहुँचाता था? पता लगाईए।
उत्तरः अशोक जनता तक अपनी बात अपने अधिकारियों द्वारा पहुँचाता था । इन अधिकारियों को महामात्र कहा जाता था। वे राज्य भर का दौरा करते थे। इसके अलावा पत्थर के स्तंभो / खंम्बो के द्वारा भी जनता तक वह अपने आदेश पहुँचाता था। आम लोगों को समझ में आए इसीलिए उसके संदेश बोलचाल की भाषा मेें होती थी जिसे प्राकृत भाषा कहते हैं।

कुछ नया करें

उन वस्तुओं की सूचि बनाईए जिन पर अशोक के चिन्ह मिलते हैं।
उत्तरः रूपया, सिक्का , झंडो
अब बताईए आपको अशोक चिन्ह में आपको क्या क्या दिखता है?
उत्तरः अशोक चक्र, तीन शेर, बैल, घोड़ा आदि दिखाई देता है।

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